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Ayurdham Wellness जिंदगी में स्वास्थ्य ही धन है
बाकी सब मोह, माया और भ्रम है ! Prevention is Better Than Cure
MANISH KAUR
WELLNESS CONSULTANT
7056574174
(2)

30/10/2025
24/10/2025

17/07/2025

बिगड़ी लाइफस्टाइल व  एक्टिव नहीं रहने से हो रहे हैं हार्ट अटैक ...तीन कारणों से युवा अटैक की चपेट में आ रहे हैं ❓बचाव क्...
08/07/2025

बिगड़ी लाइफस्टाइल व एक्टिव नहीं रहने से हो रहे हैं हार्ट अटैक ...

तीन कारणों से युवा अटैक की चपेट में आ रहे हैं ❓

बचाव क्या है ✅ पढ़ें ⤵️⤵️⬇️ महत्वपूर्ण जानकारी

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नजदीक श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर छछरौली रोड छौली जिला यमुनानगर

30/06/2025

सुप्रभात मित्रों ,इन दिनों हमारे पास बड़ी संख्या में इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्याओं (Autoimmune Disorders) के रोगी आ रहे हैं।
जहाँ एक ओर आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इन रोगों के सटीक कारणों को अभी भी समझा जा रहा है, वहीं आयुर्वेद में इसका उत्तर पहले से ही स्पष्ट रूप से दिया गया है।

आयुर्वेद कहता है कि बीमारियों की जड़ पेट का असंतुलन है।
वास्तव में, जिस शक्ति को आयुर्वेद में “अग्नि (जठराग्नि)” कहा गया है — वही हमारे स्वास्थ्य की मूल आधारशिला है।

👉 जब यह अग्नि कमजोर हो जाती है, तब विभिन्न रोग जन्म लेते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार तीन मूल बातें, जो रोग उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार होती हैं:
1. आहार (DIET)
2. विहार (LIFESTYLE)
3. मानसिक तनाव (MENTAL STRESS)

जब ये तीनों असंतुलित हो जाते हैं, तब शरीर में दोषों का संचय, प्रकोप और प्रसार होता है, जिससे अंततः मंदाग्नि उत्पन्न होती है।
यह मंदाग्नि “आम” (विषैले अपाचित तत्व) उत्पन्न करती है, जो शरीर की नाड़ियों में रुकावटें पैदा कर, आगे चलकर ऑटोइम्यून रोगों का कारण बनती है।

“स्वस्थ रहिए, जागरूक रहिए।”

आयुर्वेद अपनाए ,स्वास्थ्य लाभ पाए

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पता नजदीक श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर छछरौली रोड छौली (जिला यमुनानगर)

13/06/2025

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आयुर्वेद के जरिए मधुमेह ( शुगर) का 100 % समाधान है

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नजदीक श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर छछरौली रोड छौली जिला यमुनानगर

#डायबिटिक_जागरूकता

  आज की दुनिया में डायबिटीज़ (मधुमेह) एक बेहद आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बीमारी...
09/06/2025

आज की दुनिया में डायबिटीज़ (मधुमेह) एक बेहद आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बीमारी की जड़ में जो सबसे अहम तत्व है – वह इंसुलिन (Insulin) है?
इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है, जिसकी मौजूदगी और कार्यशैली पर हमारा संपूर्ण स्वास्थ्य टिका होता है – खासतौर पर ब्लड शुगर (रक्त में ग्लूकोज़) के स्तर को संतुलित रखने में।

इस लेख में हम आपको बताएँगे:

1. इंसुलिन क्या है?

2. यह शरीर में कैसे काम करता है?

3. इसके अभाव में क्या समस्याएँ हो सकती हैं?

4. और इंसुलिन थैरेपी क्यों ज़रूरी हो सकती है?

🧬 इंसुलिन क्या है?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं (Beta Cells) द्वारा उत्पन्न होता है।
इसका मुख्य कार्य है:

खून में मौजूद शुगर (ग्लूकोज़) को शरीर की कोशिकाओं में पहुँचाना, ताकि वह ऊर्जा में बदल सके।

सीधे शब्दों में कहें तो इंसुलिन शरीर में ईंधन को इस्तेमाल करने की चाबी है।

🍚 शुगर कहाँ से आती है?
हम जो भी खाते हैं – रोटी, चावल, फल, दूध – उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट पचने के बाद ग्लूकोज़ में बदल जाते हैं। यह ग्लूकोज़ खून में पहुँचता है और फिर शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार कोशिकाओं में भेजा जाता है।

लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में इंसुलिन का होना बेहद जरूरी है। बिना इंसुलिन के, ग्लूकोज़ कोशिकाओं तक पहुँच ही नहीं सकती। वह खून में जमा होती रहती है और यहीं से शुरू होता है मधुमेह का खतरा।

🔄 इंसुलिन कैसे काम करता है? – एक सरल उदाहरण
कल्पना कीजिए कि आपकी कोशिकाएँ एक बंद कमरे की तरह हैं, और ग्लूकोज़ उस कमरे में प्रवेश करना चाहता है। लेकिन दरवाज़ा बंद है।
इंसुलिन ही वह चाबी है जो उस दरवाज़े को खोलती है।
जब इंसुलिन दरवाज़ा खोलता है, तो ग्लूकोज़ अंदर जाकर ऊर्जा में बदल जाता है।

अगर इंसुलिन मौजूद न हो या पर्याप्त मात्रा में न हो, तो दरवाज़ा नहीं खुलता – और ग्लूकोज़ खून में तैरता रहता है।

🛑 इंसुलिन की कमी से क्या होता है?
इंसुलिन की कमी या सही ढंग से कार्य न करने पर व्यक्ति को डायबिटीज़ (Diabetes Mellitus) हो जाती है। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं:

1. टाइप-1 डायबिटीज़
यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में होती है।

इसमें शरीर बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बनाता।

रोगी को हर दिन इंसुलिन इंजेक्शन की ज़रूरत होती है।

2. टाइप-2 डायबिटीज़
यह आमतौर पर वयस्कों में होती है।

इसमें शरीर या तो कम इंसुलिन बनाता है या उसकी संवेदनशीलता (Insulin Resistance) कम हो जाती है।

इसे खानपान, व्यायाम और दवाइयों से कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, पर कई मामलों में इंसुलिन थैरेपी जरूरी हो जाती है।

🩸 इंसुलिन क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
कार्य विवरण
✅ शुगर को ऊर्जा में बदलना इंसुलिन ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुंचाता है
✅ रक्त में शुगर लेवल को संतुलित रखना अधिक या कम शुगर – दोनों ही जानलेवा हो सकते हैं
✅ फैट और प्रोटीन मेटाबोलिज्म इंसुलिन शरीर की चर्बी और प्रोटीन के पाचन में भी भूमिका निभाता है
✅ कोशिका मरम्मत और विकास इंसुलिन सेल ग्रोथ और रिपेयर में भी अहम

💉 इंसुलिन थेरेपी क्या है?
जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता, तो डॉक्टर इंसुलिन इंजेक्शन या पंप के रूप में इंसुलिन थैरेपी देते हैं।

इंसुलिन के प्रकार:
प्रकार कार्य
Rapid-acting खाना खाते ही असर करता है
Short-acting 30 मिनट में असर शुरू करता है
Intermediate-acting 12-18 घंटे तक असर करता है
Long-acting 24 घंटे या उससे अधिक तक असर करता है

इंसुलिन कैसे दिया जाता है?
इंजेक्शन (सिरिंज या पेन)

इंसुलिन पंप (बॉडी से जुड़े रहते हैं)

भविष्य में – नेज़ल स्प्रे या ओरल इंसुलिन पर रिसर्च जारी

⚠️ इंसुलिन थैरेपी से जुड़ी गलतफहमियाँ
❌ मिथक: इंसुलिन एक बार शुरू कर दिया, तो ज़िंदगी भर लेना पड़ेगा
✅ सच्चाई: यह व्यक्ति की हालत और बीमारी के प्रकार पर निर्भर करता है। कई मामलों में इंसुलिन अस्थायी रूप से दी जाती है।

❌ मिथक: इंसुलिन से वजन बढ़ता है
✅ सच्चाई: सही डोज़ और जीवनशैली के साथ वजन नियंत्रित किया जा सकता है।

❌ मिथक: इंसुलिन एक “आखिरी उपाय” है
✅ सच्चाई: कई बार शुरुआत में ही इंसुलिन देना जरूरी होता है ताकि अंगों को नुकसान से बचाया जा सके।

🍽️ इंसुलिन और खानपान का संबंध
इंसुलिन के साथ सही आहार बहुत जरूरी है। डायबिटिक व्यक्ति को:

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड जैसे ओट्स, ब्राउन राइस, हरी सब्ज़ियाँ खाना चाहिए

मीठे, तले हुए और प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए

खाने का समय नियमित होना चाहिए ताकि इंसुलिन और शुगर लेवल में तालमेल बना रहे

🏃 इंसुलिन और व्यायाम
नियमित व्यायाम इंसुलिन की कार्यक्षमता (Insulin Sensitivity) बढ़ाता है, जिससे शरीर कम इंसुलिन में भी बेहतर काम कर पाता है।
30 मिनट का brisk walk या योग, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में बहुत मददगार है।

🔍 इंसुलिन का भविष्य – नई तकनीकें
स्मार्ट इंसुलिन – जो सिर्फ ज़रूरत होने पर ही एक्टिव होती है

इंसुलिन पैनक्रिया ट्रांसप्लांट

जीन थेरेपी और आर्टिफिशियल पैनक्रियाज़

📣 निष्कर्ष:
❝ इंसुलिन सिर्फ डायबिटीज़ के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण शरीर के मेटाबॉलिज़्म के लिए अनिवार्य है ❞

इसलिए, अगर डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह दें:

डरें नहीं

शर्माएं नहीं

और खुद को दोषी न समझें

यह आपके जीवन की रक्षा करता है – ठीक वैसे ही जैसे हवा और पानी।

#इंसुलिन #डायबिटीज़ #शुगर_नियंत्रण #स्वस्थ_जीवन #मधुमेह_से_बचाव #इंसुलिन_थेरेपी #हेल्दी_हार्ट #ब्लड_शुगर_कंट्रोल #डायबिटिक_जागरूकता

भारत में गर्मी का मौसम केवल तापमान में बढ़ोत्तरी नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए एक चुनौती होती है — खासकर बच्चों और बुज़ुर...
09/06/2025

भारत में गर्मी का मौसम केवल तापमान में बढ़ोत्तरी नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए एक चुनौती होती है — खासकर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए।

जहाँ बच्चे गर्मी की परवाह किए बिना खेलना चाहते हैं, वहीं बुज़ुर्गों का शरीर अब उतना सहनशील नहीं होता जितना कभी हुआ करता था। ऐसे में उनके लिए गर्मी जानलेवा भी साबित हो सकती है, यदि देखभाल में थोड़ी सी भी चूक हो जाए।

यह लेख समर्पित है – बच्चों और बुज़ुर्गों की गर्मी में देखभाल के उन पहलुओं को, जो हर घर में अपनाए जाने चाहिए।

🔥 गर्मी से शरीर को क्या खतरे हैं?
प्रभाव लक्षण
डिहाइड्रेशन मुंह सूखना, चक्कर आना, कम पेशाब
हीट स्ट्रोक तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी
हीट रैश / घमौरी लाल दाने, खुजली, जलन
कमज़ोरी और थकान भोजन में रुचि न होना, सुस्ती

🧒 बच्चों की गर्मी में देखभाल
🍼 1. नवजात और छोटे बच्चों के लिए
नवजात शिशु को सीधी धूप से बचाएं।

उन्हें ठंडे, हवादार कमरे में रखें।

बार-बार स्तनपान या दूध दें ताकि पानी की कमी न हो।

कभी भी बच्चा रोता रहे, त्वचा गर्म लगे या सुस्त हो जाए — तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

🧑‍🏫 2. स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए
सुबह या शाम के समय ही खेलने दें।

धूप में बाहर जाते समय सिर पर कैप और आंखों पर चश्मा लगवाएं।

स्कूल के बैग में पानी की बोतल, नींबू पानी या ORS जरूर रखें।

बाहर का तला-भुना खाना खाने से मना करें।

ढीले और सूती कपड़े पहनाएं।

🥤 3. बच्चों के लिए गर्मियों में विशेष आहार
ताजे फल: तरबूज, खीरा, आम (सीमित मात्रा में), पपीता

नारियल पानी, बेल का शरबत, छाछ

जंक फूड की बजाय घर का बना हल्का खाना

फ्रीज का ठंडा पानी देने से बचें — सामान्य या मटके का पानी सबसे अच्छा

👵 बुज़ुर्गों की गर्मी में देखभाल
🪑 1. शरीर की कमजोर प्रतिरोधक क्षमता
बुज़ुर्गों में शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है।

ऐसे में हीट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

💊 2. दवा और बीमारी पर विशेष ध्यान
बुज़ुर्गों को अक्सर हृदय, ब्लड प्रेशर या शुगर की दवाइयाँ चलती हैं।

गर्मी में इन दवाओं का प्रभाव बदल सकता है।

डॉक्टर से गर्मी के अनुसार दवा की मात्रा या समय में बदलाव पूछें।

🧴 3. त्वचा की देखभाल
बुज़ुर्गों की त्वचा पतली और संवेदनशील होती है।

धूप में निकलते समय छाता, लंबी बाजू के कपड़े और सनस्क्रीन लगवाना जरूरी है।

अधिक पसीना या घमौरी होने पर डॉक्टर की सलाह लें।

🧘‍♀️ 4. मानसिक स्वास्थ्य भी है अहम
गर्मी में बुज़ुर्ग अक्सर घर से बाहर नहीं निकलते, जिससे अकेलापन और तनाव बढ़ सकता है।

दिन में समय निकालकर उनके साथ बातचीत करें, उन्हें टीवी, भजन, हल्के गेम्स या पौधों की देखभाल में व्यस्त रखें।

🏡 घर में अपनाएं ये उपाय:
🌀 1. कमरे को ठंडा रखें
सुबह और शाम घर की खिड़कियाँ खोलें ताकि ताज़ी हवा आ सके।

दोपहर में पर्दे खींच दें, पंखा चालू रखें।

जरूरत हो तो मटका या कूलर का प्रयोग करें।

कमरे में पानी से भरा बर्तन या पौधे रखें — इससे वातावरण ठंडा रहता है।

🚿 2. नियमित नहलाएं
बच्चों और बुज़ुर्गों दोनों को दिन में एक बार ज़रूर नहलाएं।

नहाने के पानी में फिटकरी या नीम की पत्तियाँ डाल सकते हैं – एंटीबैक्टीरियल प्रभाव के लिए।

🧺 3. कपड़े कैसे हों?
हल्के रंग के, सूती और ढीले कपड़े

बच्चों को सिंथेटिक ड्रेस या टाइट कपड़े न पहनाएं

बुज़ुर्गों को हमेशा सिर ढकने की सलाह दें

⛔ सावधानियाँ जो भूलनी नहीं चाहिए:
गलती क्यों न करें?
ठंडा पानी पिलाना यह पाचन में गड़बड़ी कर सकता है
दोपहर में बाहर निकलना हीट स्ट्रोक और चक्कर आ सकते हैं
खाली पेट खेलना कमजोरी और डिहाइड्रेशन का खतरा
लगातार टीवी या मोबाइल देना आंखों और दिमाग पर असर डालता है

🩺 क्या डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
बच्चा या बुज़ुर्ग यदि:

लगातार सुस्त हो

पेशाब कम हो रहा हो

तेज बुखार या सिर दर्द हो

जी मिचलाना या उल्टी हो

होश खोने जैसा महसूस हो

तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। गर्मी में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

🧃 गर्मी का संतुलित डाइट चार्ट
सुबह दोपहर शाम
गुनगुना पानी + भीगा चना दाल-चावल/रोटी + दही फल या नींबू पानी
ताजा फल (तरबूज, खीरा) हरी सब्जी, सलाद मूंग का चीला या खिचड़ी
नारियल पानी या बेल शरबत छाछ या लस्सी हल्का रात्रि भोजन

💡 विशेष सुझाव:
बच्चों को समय पर सुलाएं — नींद शरीर की मरम्मत करती है।

बुज़ुर्गों को दिन में दो बार टहला लें — हवादार जगह पर।

रोज़ाना पानी की मात्रा का ध्यान रखें:

बच्चे: 6–8 गिलास

बुज़ुर्ग: 8–10 गिलास (यदि डॉक्टर ने मना न किया हो)

📣 निष्कर्ष:
❝ गर्मी को मात देनी है, तो बच्चों और बुज़ुर्गों का साथ थामे रहना है ❞
जहाँ एक ओर बच्चे गर्मी में जल्दी बीमार पड़ सकते हैं, वहीं बुज़ुर्गों के लिए गर्मी गंभीर खतरे लाती है।
इसलिए अब लापरवाही नहीं, जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ी दवा है।

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आयुर्वेद अपनाए जीवन बचाए

  🛌 कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि सोते समय उनके मुंह से लार निकलती है। इसे अंग्रेज़ी में “drooling” कहा जाता है और यह आ...
05/06/2025

🛌 कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि सोते समय उनके मुंह से लार निकलती है। इसे अंग्रेज़ी में “drooling” कहा जाता है और यह आम बात है, लेकिन अगर यह बार-बार और बहुत ज़्यादा हो तो यह किसी अंदरूनी समस्या की ओर भी इशारा कर सकता है।

लार निकलने के संभावित कारण:
गलत सोने की पोज़िशन – ज़्यादातर मुँह से लार तब निकलती है जब आप पेट के बल या साइड में सोते हैं।

नाक से साँस लेने में कठिनाई – यदि आपकी नाक बंद रहती है (जैसे सर्दी, एलर्जी या साइनस की समस्या), तो आप मुँह से साँस लेते हैं जिससे लार बाहर निकल सकती है।

अत्यधिक लार बनना – कुछ लोगों की लार ग्रंथियाँ अधिक सक्रिय होती हैं।

न्यूरोलॉजिकल समस्याएं – यदि मुँह की मांसपेशियाँ कमजोर हैं, तो लार को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।

दांतों की समस्या या मुंह का ठीक से बंद न होना।

सही तरीके से सोने के उपाय:
पीठ के बल सोना (Back Sleeping) – इससे मुँह बंद रहता है और लार बहने की संभावना कम हो जाती है।

ऊँचा तकिया इस्तेमाल करें – इससे सिर सही पोजिशन में रहता है और लार गले में ही बनी रहती है।

नाक साफ रखें – सोने से पहले नाक की सफाई करें ताकि आप मुँह से नहीं, नाक से साँस लें।

सोने से पहले ज़्यादा खाना या मीठा न खाएं – इससे लार ज्यादा बन सकती है।

रिलैक्स होकर सोएं – स्ट्रेस भी कई बार लार बहने का कारण बन सकता है।

कब डॉक्टर से मिलें:
अगर लार बहुत ज़्यादा बहती है,

मुंह सूखने या सांस की दिक्कत के साथ हो,

या आपको सुबह गले में जलन, खांसी या खराश महसूस हो।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे
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नजदीक श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर छछरौली रोड छौली

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  24 घंटे का उपवास : आयुर्वेद की दृष्टि में एक सम्पूर्ण शुद्धि यात्राभारतवर्ष की संस्कृति में उपवास का एक विशेष स्थान रह...
05/06/2025

24 घंटे का उपवास : आयुर्वेद की दृष्टि में एक सम्पूर्ण शुद्धि यात्रा

भारतवर्ष की संस्कृति में उपवास का एक विशेष स्थान रहा है। चाहे धार्मिक पर्व हों या ऋतु परिवर्तन का समय, उपवास को केवल एक परंपरा नहीं बल्कि एक स्वास्थ्यवर्धक साधना माना गया है।

आयुर्वेद इस परंपरा को एक वैज्ञानिक प्रक्रिया की तरह देखता है जो न केवल पाचन तंत्र को आराम देता है, बल्कि शरीर की संपूर्ण सफाई करता है। आइए जानें कि 24 घंटे का उपवास आयुर्वेद के अनुसार क्यों जरूरी है, इसके क्या नियम हैं और इसे कैसे किया जाए।

🔶 उपवास का अर्थ : केवल भूखा रहना नहीं

संस्कृत में उपवास का अर्थ होता है "उप" अर्थात् निकट और "वास" अर्थात् रहना। यानी आत्मा के निकट रहना, शरीर को ब्रेक देना और मन को साधना। आयुर्वेद में इसे शरीर और मन के संतुलन की प्रक्रिया माना गया है। यह केवल खाना न खाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक साधना है जिसमें आप अपने शरीर को उसकी प्राकृतिक अवस्था में लाने का कार्य करते हैं।

🌿 आयुर्वेद के अनुसार उपवास के लाभ:

अग्नि (पाचन शक्ति) की वृद्धि: उपवास करने से जठराग्नि प्रबल होती है, जिससे पाचन बेहतर होता है।

अम (Toxins) का शोधन: शरीर में संचित विषाक्त पदार्थों (अम) को बाहर निकालने का अवसर मिलता है।

दोष संतुलन: वात, पित्त और कफ — इन त्रिदोषों का संतुलन स्थापित होता है।

मानसिक शांति: उपवास करने से मानसिक स्पष्टता और ध्यान में वृद्धि होती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि: नियमित उपवास से इम्युनिटी बेहतर होती है।

🕒 24 घंटे के उपवास की आदर्श विधि (स्टेप बाय स्टेप):

🔹 1. पूर्व तैयारी (Pre-fast):
उपवास से एक दिन पहले हल्का, सुपाच्य भोजन लें। अधिक तैलीय, मांसाहारी या भारी भोजन से बचें। रात को जल्दी भोजन करें ताकि सुबह तक पेट हल्का हो।

🔹 2. उपवास का दिन:

सुबह गुनगुना पानी या हर्बल टी पिएं।

दिनभर नींबू पानी, नारियल पानी या जीरा-सौंफ पानी लिया जा सकता है।

फलाहार उपवास में मौसमी फल जैसे पपीता, सेब, तरबूज या खीरा-नींबू का सेवन कर सकते हैं।

दिन में 2-3 बार ब्राह्मी या तुलसी का काढ़ा लेना लाभकारी होता है।

शारीरिक श्रम न करें, अधिक विश्राम लें। ध्यान, प्राणायाम और धीमी गति से योग करें।

🔹 3. उपवास समाप्ति (Breaking the Fast):

24 घंटे बाद उपवास खोलते समय सबसे पहले गुनगुना पानी लें।

फिर पतली मूंग दाल की खिचड़ी या उबली सब्जियाँ लें।

अगले भोजन में सामान्य भोजन शामिल करें लेकिन धीरे-धीरे और सीमित मात्रा में।

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